आचार्य १०८ श्री विशुद्ध सागर जी महाराज

www.vishuddhasagar.com                                       नमोस्तु शासन जयवंत हो........


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  • अध्यात्म योगी युग शिरोमणी आचार्य श्री १०८ विशुद्ध सागर जी महाराज*


    सम्यकदर्शन, ज्ञान और चारित्र ही मोक्षमार्ग है। ऐसी बात को बहुत सरल रुप से बताने वाले आचार्य भगवन्त प.पू. आध्यात्म योगी १०८ श्री विशुद्ध सागर जी महाराज यथा नाम तथा गुण रुप है। जैसा नाम है, वैसा ही आचरण है। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज को तत्वो का इतना गहन चिन्तवन है कि जिनवाणी उनके कण्ठ मे विराजमान रहती है। आचार्य श्री के प्रवचन इतने सरल व स्यादवाद से भरे होते है कि हमारे अष्टमूल गुण तो क्या, अणुव्रत और महाव्रत तक लेने के भाव हो जाते है। इनके प्रवचन मे स्यादवाद व अनेकान्त रुपी शस्त्र से मिथ्यात्व का शमन तो सहज ही झलकता है। प्रवचन सुनकर ऎसा लगता है कि हमारे ही बारे मे बात कही जा रही हो। आचार्य श्री के बारे मे जितना कहे कम है, हे गुरुवर, आचार्य भगवन्त नमोस्तु शासन को सदा जयवतं रखे।

    श्री श्री १००८ मज्जिनेन्द्र पंच कल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ परम पूज्य अध्यात्म योगी चर्या शिरोमणी आचार्य श्री १०८ विशुद्ध सागर जी ससंघ के सानिध्य में १ मार्च २०१२ से ६ मार्च २०१२ तक श्री अतिशय क्षेत्र नसियां जी, विराट नगर, जयपुर, राजस्थान में आयोजित किया गया हैं. सभी सादर आमंत्रित हैं.

    ३०-१-२०१२: परम पूज्य अध्यात्म योगी चर्या शिरोमणी आचार्य श्री १०८ विशुद्ध सागर जी ससंघ का विहार चिरगांव,झाँसी होते हुए सोनागिरजी की ओर चल रहा है.नमोस्तु शासन जयवंत हो. अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे – ९८९२२७९२०५ (9892279205) अक्षय कुमार जैन. नमोस्तु शासन संघ, मुंबई.

    Now you can watch video of Ach Shri on Swaroop Sambodhan-13/28 at : http://www.youtube.com/Ach Vishuddhasagar. 13 videos uploaded out of 28. You can write to us at namostushasangh@gmail.com or at pkjainwater@yahoo.com To receive SMS please Type:- JOIN VISHUDDHAVACHAN And SEND to 567678 or 9219592195

    ++ नमोस्तु शाìन शब्द सिर्फ दिगम्बर जैनों द्वारा ही उपयोग में लाया जाता हैं. इसका प्रमाण आप श्री मूलाचार जी ग्रन्थ में पेज क्र. १२८ पर गाथा क्र. १५१ की हिंदी और संस्कृत की टीका में पढ़ें. --- नमोस्तु शासन संघ, मुंबई."|

    @@*** श्री आदि पुराण ग्रन्थ के पृष्ठ संख्या ५८४ (584) गाथा नंबर १०३ (103) में साफ़ साफ़ लिखा हुआ हैं – “ जीव, प्राणी, जंतु, क्षेत्रज्ञ, पुरुष, पुमान, आत्मा, अंतरात जी 381;मा, ज्ञ और ज्ञानी ये सब जीव के पर्यायवाचक शब्द हैं.” अतः ज्ञानी शब्द का प्रयोग शास्त्र के अनुसार ही हैं. @@*** अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे -09324358035 पी.के जैन, कल्याण, मुंबई | |

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